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जानिये, जम्मू-कश्मीर पर नेहरू के इस बयान को अब क्यों याद कर रही है भाजपा …

शुक्रवार को लोकसभा में जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन को आगे बढ़ाने और आरक्षण के प्रस्ताव के बाद गृह मंत्री अमित शाह के बयान ने धारा-370 को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया है। लोकसभा में चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में धारा-370 स्थायी नहीं बल्कि अस्थायी है।

अब केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के हवाले से कहा है कि उन्होंने भी कहा था कि ये धाराएं घिसते घिसते घिस जाएंगी। पीएमओ में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि पंडित नेहरू भी मानते थे कि धारा-370 और धारा 35-A संविधान की अस्थायी व्यवस्थाएं हैं।

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर से लोकसभा सांसद जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा रचा गया एक बहाना है। जब ये उन्हें सूट करता है तो स्पेशल होता है अन्यथा नहीं”

अमित शाह ने लोकसभा में कहा था कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली संविधान की धारा-370 संविधान की अस्थायी व्यवस्था है। विपक्ष की शंकाओं का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि अनुच्छेद में ही साफ तौर पर लिखा है कि ये अस्थायी है।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने धारा-370 पर शनिवार को कहा कि इस मुद्दे पर हमसे विरोध करने वाले ये भूल जाते हैं कि धारा-370 और 35-A के सबसे बड़े रणनीतिकारों में शामिल पंडित नेहरू भी इस विचारधारा के थे कि ये भारत के संविधान और संविधान सभा का अस्थायी प्रावधान होने वाला है। जितेंद्र सिंह ने आगे कहा, “संविधान सभा के दूसरे सदस्यों जैसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आपत्तियों को दूर करने के लिए पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा था, ये घिसते-घिसते घिस जाएगी।

उधमपुर के सासंद डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज जम्मू-कश्मीर की हालत दूसरी होती अगर पंडित नेहरू ने अपने कैबिनेट में नंबर 2 और तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पेटल को जम्मू-कश्मीर का मसला उसी तरह सुलझाने दिया होता जिस तरह उन्होंने हैदराबाद और दूसरी रियासतों का मामला सुलझाया था। जितेंद्र सिंह ने कहा कि अगर ऐसा हुआ होता तो न सिर्फ जम्मू-कश्मीर बल्कि पूरे भारतीय उप महाद्वीप की तस्वीर दूसरी होती।

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