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अगर नीची जाति से हैं तो क्या जीने का अधिकार नहीं है ? उड़ीसा में क्यों दलितों को बचाव केंद्र से निकाला गया !!

कहते हैं कि भारत विविधिताओं का देश है, और यही विविधता भारत को खूबसूरत बनाती है। इतनी संस्कृतियों, धर्मों, विचारधाराओं को एक साथ समेटने वाले इस भूभाग पर दुनिया चकित है। लेकिन जितना सुंदर भारत ऊपर से दिखता है उतना शायद भीतर से नहीं है, धर्म और जाति के नाम पर भेदभाव आज मानव सभ्यता के 2000 साल बीत जाने के बाद भी कायम है।

और आधुनिक भारत के इसी छवि पर एक कलंक आया है उड़ीसा से। उड़ीसा में कुछ दिनों पहले आये चक्रवाती तूफ़ान फ़ानी ने बेहद तबाही मचाई थी। लेकिन राज्य सरकार ने इस प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए जो इंतज़ाम किये थे उन्हें देखकर संयुक्त राष्ट्र ने भी कहा कि ऐसा इंतज़ाम पहले कभी नहीं किया गया।

Cyclone Fani: Dalits in Puri say they were turned away from shelters at height of storm

पूरे देश में जब इस आपदा से बचाने के लिए राज्य प्रशासन को तारीफें मिल रही थी उसी बीच एक खबर आयी कि इस जानलेवा तूफ़ान के बीच 25 परिवारों को सरकार द्वारा बनाये गए बचाव केंद्रों से इसलिए बाहर निकाल दिया गया क्योंकि वो दलित थे। उड़ीसा के पाटली पंचायत के बिरिपदिया गाँव के आस-पास 4 किलोमीटर के दायरे में कुल 3 बचाव केंद्र थे, जहाँ राज्य सरकार ने सुरक्षा और उपचार सुविधाएं मुहैय्या करवाई थी। लेकिन इसी गाँव के 25 परिवारों के 85 लोगों को जिनमें बच्चे, महिलाएं और बूढ़े भी शामिल थे उन्हें केंद्र से “ऊँची जाति” के लोगों द्वारा लौटा दिया गया।

और इसके बाद इस तूफ़ान में उन परिवारों ने तूफ़ान के कारण गिरे पेड़ों के नीचे शरण ली।

“ऊँची जाति के लोगों ने हमें वहां से निकलवा दिया क्योंकि हम डोम जात से हैं”
बिरिपदिया की रहने वाली शैल जीना ने मीडिया को बताया। इतना ही नहीं बहुजन समाज यूथ फ्रंट के एक कार्यकर्त्ता अनिल कुमार मलिक ने इस घटना का वीडियो भी बनाया ताकि बाद में ढोंग करने वाले लोग इस घटना को अफवाह बताकर अपना पल्ला न झाड़ लें।

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उड़ीसा के स्पेशल रिलीफ़ कमिश्नर बिष्णुपदा सेठी ने कहा कि उन्हें इस घटना के बारे में जानकारी मिली थी और उस इलाके के डिप्टी कमिश्नर की रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं।

“इस तरह की घटना समाज में अपना दबदबा रखने वाले लोग करते हैं यह बहुत ही गिरी हुई हरकत है हमारी सरकार इस बारे में कड़ी कार्यवाही करेगी, हमारी सभी लोगों से अपील है कि मानव की तरह ही बर्ताव करें। ” सेठी ने एक मीडिया हाउस से कहा।

सेठी ने इसके अलावा ये भी बताया कि इसी तरह की घटना उन्होंने साल 2004 में पुरी तूफ़ान के दौरान भी देखी थी।

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सरकार अपनी तरफ़ से अगर सबके विकास की बात करती भी है तो समाज खुद खूंटे से बंधी गाय की तरह अड़ जाता है। चाहें कितनी ही विदेशी कंपनियां इस देश में लग जाएँ, रुपया कितना ही ऊपर उठ जाए जब तक ये सामजिक भेदभाव, लोगों के मन में अपनी जाति और अपने धर्म को लेकर अभिमान है तब तक ये देश कभी विकसित नहीं हो सकता।

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