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देश के वाहनों में होने वाला है क्रन्तिकारी बदलाव, अगले 10 सालों में बदल जाएगा सब कुछ !!

भारत में इन दिनों प्रदूषण सबसे बड़े संकटों में से एक है, जिसके कारण हर साल कम से कम 3,00,000 लोगों की मौत होती है। सरकार का ध्यान इस आंकड़ें पर तब गया जब भारत के 6 शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित 10 शहरों में शामिल हुए। इसीलिए नीति आयोग ने जल्दी से एक बैठक में ये प्रस्ताव रख दिया कि 2030 तक देश के सभी वाहन पूर्णतः इलेक्ट्रिक होंगे। जिसके बाद वाहन बनाने वाली कंपनियों ने भी सरकार के इस कदम पर सवाल उठाये।

इसी दौरान जब भारत में पूर्ण रूप से पहली इलेक्ट्रिक बाइक भी लॉन्च हो गयी तब सरकार इसे अमली जामा पहनाने की पूरी कोशिश में जुट गयी है।

जिसके लिए अगले तीन वर्षों में 15 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सरकार 10 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी देगी। ताकि दाम कम होने से लोग डीजल-पेट्रोल की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों से चलने में रुचि लें।

दरअसल, देश में क्‍लीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए अप्रैल, 2015 में मोदी सरकार ने ‘फेम इंडिया’ स्‍कीम लांच की थी। फास्‍टर एडॉप्‍शन एंड मैन्‍युफैक्‍चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिकल व्‍हीकल्‍स (फेम) नामक इस स्कीम के तहत वाहनों से हो रहे प्रदूषण को कम करने की तैयारी है। लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में भारी उद्योग मंत्री अरविंद गणपत सावंत ने यह जानकारी दी है।

भारी उद्योग विभाग की ओर से भारत में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों का तीव्र अंगीकरण एवं विनिर्माण(फेम इंडिया) योजना का दूसरा चरण एक अप्रैल, 2019 से शुरू हुआ है। इस चरण में सब्सिडी के जरिए सात हजार ई-बसों, पांच लाख ई तिपहिया वाहन, 55000 यात्री कार और 10 लाख दुपहिया वाहनों के लिए आर्थिक सहायता देने का लक्ष्य है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चुनिंदा शहरों और मुख्य राजमार्गों पर चार्जिंग प्वॉइंट लगेंगे। ताकि सड़क पर चलते समय किसी को चार्जिंग खोजने के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े।


सरकार ने बताया है  वाहनों की लंबाई आधारित जीएसटी वर्गीकरण से भी सड़कों पर भीड़भाड़ कम करने की कोशिश है। इसलिए छोटे वाहनों के लिए कम जीएसटी और बड़े वाहनों पर अधिक जीएसटी लागू है। इतना ही नहीं, सीएएफई मानकों के माध्यम से कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन को नियंत्रित किया जा रहा है। कंपनियों को निर्देशित किया जा रहा है कि कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने के लिए निर्देश दिए जा रहे हैं।

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