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सेना के गोला-बारूद का गिरा हुआ स्तर बन रहा है हादसों का कारण, आर्मी ने लगाई सरकार से गुहार !!

पिछले कुछ सालों में सरकार ने देश के नागरिकों को अपने कामों के बजाय सेना के कामों पर ध्यान देने को कहा है और उनके शौर्य और पराक्रम के बदले अपनी पार्टी को वोट देने की अपील की है।

लेकिन क्या भारतीय सेना को वो सुविधाएं मिल रही हैं जिनकी वो हक़दार है, जवाब है नहीं।

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और इसीलिए भारतीय सेना ने अपने घटिया गोला-बारूद और युद्ध उपकरणों से प्रशिक्षण के दौरान बढ़ते हादसों पर चिंता जताई है। ये गोला-बारूद सरकार के ऑनरशिप वाले “ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड” से सप्लाई किये जाते हैं। जिनमें टैंक, तोप, एयर डिफेंस गन और दूसरे युद्ध उपकरण शामिल हैं, सेना ने इस गम्भीर विषय को लेकर रक्षा मंत्रालय से भी बात की है।

ताज़ा जानकारी के मुताबिक सेना का कहना है कि घटिया क्वॉलिटी के गोला-बारूद के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में सैनिकों की जानें जा रही हैं, सैनिक घायल हो रहे हैं और इससे रक्षा उपकरणों को भी नुकसान पहुंच रहा है। सेना ने रक्षा सचिव (उत्पादन) अजय कुमार के सामने ऑर्डिनेंस फैक्ट्री द्वारा गोला-बारूद की गुणवत्ता पर अपेक्षित ध्यान न दिए जाने को लेकर इस मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

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ग़ौरतलब है कि ओएफबी की देशभर में 41 फैक्ट्री हैं और उसका सालाना टर्नओवर लगभग 19,000 करोड़ रुपये का है। जो 12 लाख संख्या की भारतीय सेना को हथियार और गोला बारूद सप्लाई करने का मुख्य स्रोत है।

इस मामले में सबसे गंभीर बात ये है क़ी ‘ओएफबी के उत्पादों की गुणवत्ता में आई किसी भी कमी के कारण उसका असर देश की युद्ध क्षमताओं पर पड़ रहा है।’

इस चेतावनी को लेकर सेना और रक्षा सचिव ने ओएफबी के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए रणनीति तैयार करने की बात की है। रक्षा सचिव उत्पादन ने सेना को अपनी शिकायतों को लिखित रूप में प्रस्तुत करने के लिए कहा है।

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15 पेजों के दी गई इस रिपोर्ट में सेना ने अपनी शिकायत प्रस्तुत की है जो एक बेहद गंभीर तस्वीर प्रस्तुत करती है। इसमें कहा गया है कि नियमित दुर्घटनाएं 105 एमएम की इंडियन फील्ड गन्स, 105एमएम लाइट फील्ड गन्स, 130एमएम एमए 1 मीडियम गन्स, 40 एमएम एल-70 एयर डिफेंस गन्स और टू-72, टी-90 और अर्जुन बैटल टैंक्स से हो रही हैं।

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इसके अलावा देश में कारगिल युद्ध की जीत का बड़ा कारण बनी बोफ़ोर्स 155 एमएम गन के भी ख़राब होने के मामले सामने आये हैं। वहीँ सेना के एक क़रीबी के अनुसार, ‘ओएफबी समस्या को सुलझाने के प्रति गंभीर नहीं है। जिसकी सवजह से सेना ने लंबी दूरी के गोला-बारूद से फायरिंग बंद कर दी है।’

अब इस मामले में सरकार क्या रवैय्या अपनाती है वो तो तब ही पता चलेगा जब ये ख़बर आम जनता तक पहुँच जाएगा, वरना सत्ता के सामने सेना भी केवल जनता ही है जिनका ध्यान उन्हें केवल चुनावों के समय आता है।

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