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एमरजेंसी ऐसा दाग़ है जो कभी मिट नहीं सकता, हमें इसे याद रखना होगा – पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने आज लोकसभा में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दिया. राष्ट्रपति ने अभिभाषण पर दोनों सदनों में चर्चा सोमवार को शुरु हुई थी। पीएम मोदी बुधवार को दोपहर 2 बजे राज्यसभा में भी धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देंगे। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के अभिभाषण का धन्यवाद दिया ही साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर भी जमकर हमला बोला।


प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण की शुरूआत करते हुए कहा, ”राष्ट्रपति जी ने अपने भाषण में हम भारत को कहां ले जाना चाहते हैं, कैसे ले जाना चाहते हैं, भारत के सामान्य मानवीय की आशा, आक्षाओं की पूर्ति के लिए किन चीजों को प्राथमिकता देना चाहते हैं उसका एक खाका खींचने का प्रयास किया है। राष्ट्रपति जी का भाषण देश के सामान्य मानवीय ने जिस आशा और आक्षाओं के साथ भेजा है उसकी प्रतिध्वनि है। इसलिए राष्टपति जी के भाषण का धन्यवाद देश के कोटि कोटि जनों का भी धन्यवाद है। एक सशक्त, सुरक्षित, संवृद्ध, समावेशी राष्ट्र का सपना हमारे देश के कई महापुरुषों ने देखा है। उसको पूर्ण करने के लिए संकल्पवद्ध होकर के अधिक गति के साथ हम सब को मिल जुलकर आगे बढ़ना है। यह समय की मांग है और देश की अपेक्षा है, आज के वैश्विक वातावरण में यह अवसर भारत को खोना नहीं चाहिए। इस चर्चा में करीब 60 सांसदों ने हिस्सा लिया। जो पहली बार आए हैं उन्होंने अच्छे से अपनी बात रखने का प्रयास किया, चर्चा को सार्थक बनाने का प्रयास किया। जो अनुभवी हैं उन्होंने अपने अपने तरीके से चर्चा को आगे बढ़ाया।”



प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शुरुआती भाषण में किसी का नाम लिए बिना विपक्ष पर तंज कसा। उन्होंने कहा, ”यह बात सही है कि हम सब मनुष्य़ हैं, तीस दिन में मन में जो छाप रहती है उससे निकलना कठिन रहता है। इसलिए चुनावी भाषणों का असर भी देखने को मिला और वो बाते भी यहां देखने को मिल रही थीं। अध्यक्ष जी आप नए हैं, लोगों के प्रयास होता है कि जब आप नए हों तो शुरू में ही थोड़ी परेशानी में डाल दिया जाए लेकिन आपने बहुत अच्छे ढंग से इन सब चीजों को चलाया। इसके लिए आपको बहुत बहुत बधाई देता हूं”


पूर्ण बहुमत वाले जनादेश के लिए प्रधानमंत्री ने देश की जनता को धन्यवाद दिया, उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है। प्रधानमंत्री ने कहा, ”कई दशकों के बाद देश ने एक मजबूत जनादेश दिया है, एक सरकार को दोबारा फिर से लाए हैं। पहले से अधिक शक्ति देकर लाए हैं। आज के सामान्य वातावरण में, भारत जैसे लोकतंत्र में हर भारतीय के लिए गौरव का विषय है कि हमारा मतदाता कितना जागरुक है। वह अपने से ज्यादा अपने देश को प्यार करता है। देश के लिए निर्णय करता है, यह चुनाव में साफ साफ नजर आया। देश के मतदाता अभिनंदन के अधिकारी हैं, 2014 में हम पूरी तरह नए थे लेकिन उन स्थितियों से बाहर निकलने के लिए एक प्रयोग के लिए हमें मौका दिया। लेकिन 2019 का जनादेश पूरी तरह कसौटी पर कसने के बाद दोबारा हमें बैठाया है, यह लोकतंत्र की बहुत बड़ी जीत है”





प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला, उन्होंने कहा कि आप इतने ऊंचे हो गए हैं कि आपको नीचे का दिखना बंद हो गया है। प्रधानमंत्री ने कहा, ”यहां बहुत अच्छी बातें बताई गईं, ज्यादातर चुनावी छाया वाली बातें बताई गईं. यहां कहा गया कि हमारी ऊंचाई को कोई कम नहीं कर सकता। ऐसी गलती हम कर बी नहीं सकते. हम किसी की लकीर छोटी नहीं कर सकते हम अपनी लकीर को बढ़ाने के लिए जीवन कपा देते हैं। आपको आपकी ऊंचाई मुबारक हो क्योंकि आप इतने ऊंचे चले गए हैं कि जमीन दिखना बंद हो गई है। आप इतने ऊंचे चले गए हैं कि जो जमीन पर हैं वो दिखना बंद हो गए हैं. इसीलिए आपकी ऊंचाई मेरे लिए अत्यंत संतोष की बात है। मेरी कामना है कि आप और ऊंचे बढ़ें। हमारी कोई स्पर्धा है कि हमारा सपना जड़ों से जुड़ने का है। हमारा रास्ता जड़ों से जुड़कर देश को आगे ले जाने का है.”




प्रधानमंत्री ने आज इमरजेंसी की बरसी के बहाने भी कांग्रेस पर हमला बोला, उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा दाग है जो कभी मिट नहीं सकता। प्रधानमंत्री ने कहा, ”आज 25 जून है, बहुत लोगों को जानकारी भी नहीं है कि 25 जून क्या है. अगल बगल में पूछना पड़ता है। 25 जून की उस रात को देश की आत्मा को कुचल दिया गया था। भारत में लोकतंत्र संविधान से पैदा नहीं हुआ भारत में लोकतंत्र हमारी आत्मा में है। इसलिए देश की आत्मा को कुचल दिया गया था. देश के महापुरुषों को जेल की सलाखों के पीछे बंद कर दिया गया था। आज 25 जून को हम लोकतंत्र के प्रति अपना संकल्प को और मजबूती से बताना होगा”


प्रधानमंत्री ने कहा, ”उस समय जो जो भी इस के भागी थे, यह दाग मिटने वाला नहीं है. इस दाग को इसलिए याद करने की जरूरत है जिससे देश में फिर कोई ऐसा पैदा ना हो जिसे पिर इस रास्ते पर जाने की इच्छा हो जाए. उस समय जब मीडिया पर ताले लग चुके थे, हर किसी को लगता था कि पुलिस आकर गिरफ्तार कर लेगी। देश ने उस समय जाति, धर्म से ऊपर उठकर लोकतंत्र को स्थापित किया था। इस बार फिर जाति धर्म और संप्रदाय से ऊपर उठकर देश के लिए मतदान किया गया.”


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