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बिना वारंट के नोएडा में तीन पत्रकार गिरफ़्तार, पत्रकारों पर होने वाले हमलों के बारे में सवाल कौन पूछेगा ?

अगर देश में किसी इंसान पर किसी समुदाय पर कोई भी विपदा आती है या कोई तकलीफ़ होती है तो सरकार और सेना से पहले वहां पहुँचते हैं पत्रकार। मैं उन पत्रकारों की बात नहीं कर रहा हूँ जो बंद कमरों में एसी की ठंडक में बैठकर सिर्फ़ कैमरा के सामने ज़ुबान चलाते हैं। हम तक खबरें बहुत बाद में पहुँचती हैं हम केवल एक चेहरा हैं जो उस ख़बर को विश्वसनीय तरीके से आप तक पहुँचाते हैं।

असल काम करते हैं वो लोग जो अपनी जान पर खेलकर, देश के दुर्गम क्षेत्रों में जाकर उन लोगों की आवाज़ बनते हैं जिन्हें हम अपने आधुनिक भारत में गिनना पसंद नहीं करते। और फिर जब ख़बर के बाद उसका असर हो जाता है समस्याएं सुलझ जाती हैं तब उनके पास कोई फ़ैन नहीं होता।

आज दिल्ली में 45 डिग्री तापमान है लेकिन आज भी कई चैनल्स कई एजेंसियों के लोग शहर की सड़कें नाप रहे हैं। देश में लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहे जाने वाले मीडिया की नींव इनकी मेहनत से बनी है।

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लेकिन भारत एक ऐसा देश है जहां पर फ़िल्मी सितारों की तरह न्यूज़ में भी स्टार कल्चर चल चुका है, कोई इसलिए फ़ेमस है क्योंकि वो देश की समस्याओं को सामने लाता है तो कोई इसलिए फेमस है कि वो सरकार से हर बात पर सवाल करता है।

और ऐसा ही एक सवाल पूछे जाने के कारण उत्तर प्रदेश पुलिस ने दिल्ली के तीन पत्रकारों को गिरफ़्तार कर लिया। दिल्ली के रहने वाले प्रशांत कनौजिया की गलती केवल ये थी कि उन्होंने एक वीडियो शेयर किया था जिसमें एक महिला कह रही थी कि वो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेमिका है।

इस वीडियो को शेयर करते हुए प्रशांत ने लिखा था, इश्क़ छुपता नहीं छुपाने से योगी जी”

रविवार को करीब 12 बजे पुलिस आती है और प्रशांत को बिना वारंट इस तरह पकड़ कर ले जाती है जैसे मानो उन्होंने देश की सुरक्षा को बहुत बड़ा नुकसान पहुँचाया हो। पुलिस का कहना है कि उन्होंने प्रशांत के ख़िलाफ़ मानहानि का केस दर्ज किया है, जिसकी शिकायत उनसे किसी ने नहीं की है।

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इसके अलावा उन्होंने कहा कि प्रशांत के ट्वीट के कारण भाजपा कार्यकर्ता गुस्से में हैं और उन्हें ठेस पहुंची है। इन पुलिस वालों को इस बात की चिंता नहीं है कि राज्य में साम्प्रदायिक तनाव दिनों दिन बढ़ता जा रहा है, बहन-बेटियां सुरक्षित नहीं है, इंस्पेक्टर सुबोध त्यागी की हत्या करने वाली भीड़ अब भी खुले आम घूम रही है। इन्हें चिंता है कि मुख्यमंत्री के बारे में किसी ने ट्वीट कैसे किया।

इसी मामले में हमारे पड़ोस में ही नोएडा सेक्टर 63 के चैनल नेशन लाइव की हेड इशिका सिंह और एडिटर इन चीफ़ अनुज शुक्ल को गिरफ़्तार कर लिया गया।

अभी कुछ ही दिनों पहले झारखण्ड के पत्रकार रुपेश कुमार सिंह को पुलिस ने इस लिए गिरफ़्तार कर लिया कि उनके घर से नक्सली साहित्य मिला है। नक्सली साहित्य क्या होता इसकी परिभाषा में पुलिस ने कहा कि “ऐसा साहित्य जिसे पढ़कर आप नक्सली बन सकते हैं”

पत्रकारों पर आये दिन इस तरह के सांस्थानिक हमले आम हो चुके हैं, आये दिन उन्हें धमकियां मिलती रहती हैं, ऐसे में लोकतंत्र का ये चौथा स्तम्भ कब अंदर से खोखला हो जाए कुछ पता नहीं।

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